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मोदी जी/भाजपा के अल्पसंख्यक तुष्टीकरण विरोध से अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के रिकॉर्ड तोड़ने की कथा


मोदी सरकार और भाजपा के छद्म हिन्दुत्व और अल्पसंख्यक प्रेम और हिन्दू द्रोह का खुलासा करने वाली स वर्ष का अब तक सबसे महत्वपूर्ण लेख है। 


ये भाजपा का 2006 का विचार है कि सच्चर कमेटी रिपोर्ट पूर्वाग्रहों से भरी पड़ी है। ऐसे अनेकों न्यूज़ लिंक मिलेंगे जिसमे भाजपा अल्पसंख्यक, विशेषकर मुस्लिम हितकारी सच्चर कोमेटी रिपोर्ट का विरोध कर रही है। 

भाजपा अध्यक्ष ने काँग्रेस द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए बनाई सच्चर कमेटी रिपोर्ट को अल्पसंख्यक तुष्टीकरण कहा और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण को अगले दस वर्षों में समाप्त करने की घोषणा करी। ये घोषणा न केवल पूरी तरह झूठी प्रमाणित हुई, अपितु भाजपा ने 2014 में केंद्र सरकार में आने के बाद इसी सच्चर कोमेटी रिपोर्ट को काँग्रेस से कई गुना बड़ कर लागू किया और हिंदुओं के साथ पक्षपात किया, जिसके बारे में इसी लेख में आगे वर्णन है।


ये मोदी जी का स्टैंड प्रधानमंत्री बनने से पहले था। 

सच्चर कमेटी गैर कानूनी है, ये सिर्फ मुस्लिमों को सहायता करने के लिए है। 

http://archive.indianexpress.com/news/gujarat-to-supreme-court-sachar-panel-illegal-only-to-help-muslims/1200518/0

मार्च 2014 में मोदी जी सच्चर कोमेटी के पक्ष में थोड़ा बोलने लगे और भाजपा ने यू टर्न लिया, तब तक बहुत बड़ा हिन्दू वर्ग उनके पक्ष में आ चुका था। 

https://www.thehindubusinessline.com/news/national/BJP-does-a-U-turn-on-Sachar-Committee/article20737026.ece

प्रधानमंत्री बनने के बाद-

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने इसी मुस्लिम समर्थक सच्चर कमेटी रिपोर्ट को और तेजी से लागू किया और संसद में रिपोर्ट तक प्रस्तुत की है कि मोदी सरकार बहुत ही अच्छे तरीके से सच्चर कमेटी रिपोर्ट को लागू कर रही है। उस रिपोर्ट का लिंक है 
http://www.minorityaffairs.gov.in/sites/default/files/Sachar%20Committee%20Status_2.pdf





मोदी सरकार ने संसद में बताया कि उन्होने कॉंग्रेस के दो कार्यकालों से बड़कर अल्पसंख्यक छात्रों को 2.5 करोड़ छात्रवृत्तियाँ दी। ज्ञात रहे कि कॉंग्रेस ने 29 मई 2012 की रिपोर्ट के अनुसार 2 करोड़ अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्तियाँ दी थी। 

मनमोहन सिंह सरकार द्वारा बनाए गए अल्पसंख्यकों के कल्याणके लिए 15 सूत्री कार्यक्रमों की रिपोर्ट भी मोदी सरकार ने प्रस्तुत करी, जो मनमोहन सरकार को भी पीछे छोड़ गई। 

http://www.minorityaffairs.gov.in/sites/default/files/EVALUATION%20OF%20PM%27s%2015%20PP.pdf
आज की स्थिति ये है कि जब मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई थी तो केंद्रीय सरकारी नौकरियों में लगभग 5 प्रतिशत अल्पसंख्यक थे जो मुख्तार अब्बास नक़वी जी के वक्तव्य के अनुसार 2017 में ही दुगुने 10 प्रतिशत हो चुके थे। अब ये गणना 15 प्रतिशत के आसपास ही होगी। 

फिर रिपोर्ट ये भी आई कि अब भाजपा की अल्पसंख्यक विशेष मुस्लिम हितैषी सच्चर कमेटी रिपोर्ट में कॉंग्रेस से भी अधिक रुचि है
https://theprint.in/opinion/bjp-is-more-interested-in-sachar-report-on-muslims-than-congress-now/155367/

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