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2019 के चुनावों में नोटा प्रचार के मुख्य 11 कारण

2019 के चुनावों में मैं नोटा का समर्थन कर रहा हूँ और नोटा का ही प्रचार करूँगा। नोटा का प्रचार नोटा सेना नोटा सेना के माध्यम से किया जाएगा। 


नोटा प्रचार के मुख्य 12 कारण निम्नलिखित हैं।

1-मोदी सरकार द्वारा अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के पिछली सभी सरकारों के रिकॉर्ड तोड़ते हुए पहले साढ़े 4 वर्षों में 2.5 करोड़ अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां देना और उन्ही मापदंडों पर 1 भी हिन्दू विद्यार्थी को छात्रवृत्ति नहीं देना। ज्ञात रहे कि कांग्रेस नेतृत्व में 29 मई 2012 को सलमान खुर्शीद द्वारा दिये आंकड़ों के अनुसार 8 वर्षों में 2 करोड़ अल्पसंख्यकों को छात्रवृत्तियां दी गई थी और उन्हीं मापदंडों पर 1 भी हिन्दू को छात्रवृत्ति नहीं दी गई थी। इन नीतियों का आधार कांग्रेस नेतृत्व में UPA I-II द्वारा झूठे आंकड़ों से बनाई सच्चर कमेटी रिपोर्ट है। UPA I-II की इसी सच्चर कमेटी रिपोर्ट और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण नीति का भरपूर विरोध कर मोदी सरकार 2014 में सत्ता में आई थी किन्तु सत्ता में आते ही मोदी सरकार पलट गई और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण में लग गई, और हिंदुओं को धोखा देकर इतिहास का सबसे बड़ा पक्षपात और शोषण किया।

2-अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों का हिस्सा सर्वाधिक किया गया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार ही स्वतंत्रता के 67 वर्षों के बाद भी 2014 में सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यक 5% प्रतिशत थे जो मोदी सरकार के अल्पसंख्यक तुष्टिकरण नीतियों से 4 वर्षों में ही दुगुने होकर 10% प्रतिशत हो गए। इसका अर्थ यही हुआ कि हिंदुओं का प्रतिशत गिर गया। ऐसा सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ जबकि मोदी सरकार ने इसके लिये अल्पसंख्यकों को विशेष सुविधाएं दी। इसमें विशेष बात ये है कि 2016 में भाजपा मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने संसद में सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों के हिस्से पर विशेष जानकारी दी।

3-श्री रामजन्मभूमि मंदिर पर भाजपा/मोदी जी का पलटना। राम मंदिर पर चुनावी मेंनिफेस्टो में कोई वचन देने का अर्थ यही होता है कि सरकार में आने पर इसके लिये कानून बनाएंगे। 3 महीने पहले मोदी जी ने आने साक्षात्कार में स्पष्ट कर दिया कि राम मंदिर पर कोई कानून नहीं लाएंगे। 2 भाजपा सांसदों ने भी प्राइवेट मेंबर बिल लाने का वचन दिया था। वे भी इस पर पलट गए।

4A-सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटने के लिए SC/ST एट्रोसिटी संशोधन बिल लाना।

4B-जातिगत आरक्षण में सुधार और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से भेदभाव समाप्त हो। 

5-हटा देने की शक्ति होने के बाद भी मोदी सरकार द्वारा संविधान की धारा 370 न हटाना। कश्मीरी पंडितों की वापसी पर विफलता।

6-2005 की सुप्रीम कोर्ट के विशेष निर्णय के बाद भी बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर न करना।

7-लाखों पुरुषों द्वारा आत्महत्या करने के बाद भी पिछली सभी सरकारों द्वारा धारा 498A न हटाना।

8-CRPF रिटायर्ड जवानों की पेंशन समस्या वहीं की वहीं।

9-सबरीमला मंदिर पर सब पार्टियों का मौन और मोदी सरकार द्वारा इस पर अध्यादेश न लाना।

10-समलैंगिकता को मान्यता देने वाली धारा 377 के विरुद्ध पेटिशन पर मोदी सरकार की निष्क्रियता और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटने के लिए अध्यादेश न लाना। समलैगिकता हिन्दू समाज का सर्वनाश कर देगी, इस पर रोक अति आवश्यक है।

11-विवाह के बाहर अनैतिक संबंधों से संबंधित धारा 497 पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सभी पार्टियों की मौन स्वीकृति और मोदी सरकार द्वारा इसे न पलटना।
जय नोटा, सबका नोटा।












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