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“अब की बार, तोगड़िया का प्रहार”?


2019 के लोकसभा चुनावों की शतरंज बिछ रही है। सब राजनैतिक दलों के उम्मीदवार मोहरे अपने अपने मोर्चे पर स्थिति जमा रहे हैं। राजनैतिक दलों के राजा-रानियाँ भी तैयार हो रहे हैं और उम्मीदवार मोहरों को टटोल रहे हैं कि कहीं कोई हल्का मोहरा न खेल में आ जाए। सब फुर्ती से दिमाग और शरीर दोनों चला रहे हैं कि विजय हो। इस राजनैतिक शतरंज के खेल में दो खिलाड़ी नहीं, अनेकों खिलाड़ी होते हैं जो किसी भी दिशा से खेल सकते हैं। इसलिए ये राजनैतिक खेल और भी रुचिकर होता है।

5 वर्ष पहले देखें तो मई 2014 में "अबकी बार मोदी सरकार" के नारे के साथ भाजपा 282 सांसदों के साथ पहली बार पूर्ण बहुमत से केंद्र में सरकार में आई, तो हिन्दुत्ववादियों के हृदय प्रफ़्फुलित हो उठे थे कि अब हिन्दुत्व के कार्य अधिक से अधिक होंगे।  2018 आते आते मोदी सरकार के कार्यों से असंतुष्टि और विरोध के सुर भी उठने लगे। ये सुर भाजपा के अंदर से, जैसे यशवंत सिन्हा जी और शत्रुघन सिन्हा जी, के भी थे और हिंदुत्व के विभिन्न धड़ों के नेताओं के भी। इनमे सबसे ऊँची और सशक्त आवाज़ जो सामने आयी वो थी विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व वरिष्ठ नेता श्री प्रवीण तोगड़िया जी की। अपने जीवन के सुनहरे दशक विश्व हिन्दू परिषद को देने के बाद अब प्रवीण तोगड़िया परिणाम न दिखने के कारण विरोधी हो रहे थे और ये स्वाभाविक ही था।

चूंकि भाजपा पार्टी केंद्रीय पटल पर मुख्यतः श्रीरामजन्मभूमि मंदिर विषय पर राजनीति करती हुई ही आयी थी तो श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर कुछ भी कार्य न करने पर प्रश्न तो उठने ही थे।

मैं इस तोगड़िया कथा को अप्रैल 2018 से आरंभ कर रहा हूँ जो वास्तव में "तोगड़िया Vs मोदी" की कथा है। "तोगड़िया Vs मोदी" बहुत पहले आरंभ हुआ था किन्तु शुद्ध "तोगड़िया Vs मोदी" अप्रैल २०१८ जब तोगड़िया जी ने मोदी जी का स्पष्ट नाम लेकर तीखे वक्तव्य देने आरंभ किए।

अप्रैल 2018

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर विषय पर प्रश्नों को और बड़ा करते हुए पिछले वर्ष अप्रैल में तोगड़िया जी ने सशक्त आवाज़ में श्री रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण में लगातार हो रही देरी के लिए मोदी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए बोला था। 

Photo Credit-Dainik Jagran

उन्होंने कहा था कि  
"केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सरकार ने चुनाव से पहले वादा किया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार संसद में कानून लेकर आएगी। सरकार अब लोगों को कोर्ट की राह देखने को कह रही है। हिंदुओं की बेरोजगारी, आत्महत्या, यहां बंद होते कारखाने और लगातार पिछडऩे को मुद्दा बनाते हुए कहा कि रामजन्म भूमि पर बाबरी मस्जिद बनाने की साजिश चल रही है और सरकार खामोशी से तमाशा देख रही है

उन्होने यहाँ तक बोल दिया कि 
देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए ही कारसेवकों को आगे किया गया। अब जब सरकार बन गयी तो सरकार उस बलिदान को भूल गयी है।
साथ ही अन्य विषयों को जोड़ते हुए वे बोले थे कि उन्होंने कहा कि चार वर्ष में न तो राम मंदिर बना, न ही विस्थापित कश्मीरी हिंदुओ को वापस घर भेजा गया और न ही गोरक्षा कानून सरकार बना पाई

ये विदित रहे कि दो महीने पहले मोदी जी ने अपने एक साक्षात्कार में ये बोल दिया था कि उनकी सरकार श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर कोई कानून नहीं लाएगी।

चुनाव से पहले विहिप कार्यालय में धक्का-मुक्की


तोगड़िया जी के मोदी सरकार के विरुद्ध बोलते ही वीएचपी के अंदर उनका भी विरोध आरंभ हो गया था। पिछले वर्ष वीएचपी के पदाधिकारियों के चुनाव से पहले वीएचपी कार्यालय में ही वीएचपी के सबसे बड़े नेता स्वयं तोगड़िया जी के साथ धक्का मुक्की तक हो गई। आरोप प्रत्यारोप हुए। इस समय तक तोगड़िया जी की वीएचपी से विदाई तय मानी जा रही थी।

वीएचपी से विदाई

52 वर्षों में पहली बार वीएचपी में अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए, तोगड़िया पक्ष इस चुनाव में हार गया और श्री विष्णुसदाशिव कोकजे को विश्व हिन्दू परिषद के चुनाव में अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किए गए। 

प्रधानमंत्री मोदी जी को पत्र और अनशन 

इस चुनाव के साथ ही वीएचपी में तोगड़िया युग का अंत तो हो गया किन्तु तोगड़िया जी का अपने मुख्य विषयों जैसे श्रीराम जन्मभूमि, गौहत्या का विरोध, बंगलादेशी घुसपैठियों को बाहर करना, समान नागरिक संहिता और कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास आदि पर आंदोलन चलता रहा। वीएचपी से बाहर होते ही उन्होने प्रधानमंत्री मोदी जी को इन विषयों पर पत्र लिखा और गुजरात के अहमदाबाद के पालडी इलाके में विहिप के मुख्यालय डॉ वणकर भवन के बाहर ही  तोगड़िया अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अनशन पर बैठ गए।
इस अनशन में उनकी दस प्रमुख मांगे थी।
1. राममंदिर के लिए संसद में कानून
2. गोहत्या पर देशभर में लगे रोक
3. देश में समान नागरिक कानून लागू हो
4. कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास किया जाए
5. बांग्लादेशी व रोहिंग्या मुस्लिमों को बाहर निकाला जाए 
6. किसानों को उपज को डेढ़ गुना मिले
7. युवाओं के लिए अलग कोष तैयार किया जाए 
8. मजदूरों को पूरी पगार व पेंशन सुविधा दी जाए 
9. शिक्षा व स्वास्थ्य सस्ती व गुणवत्तावाली बने
10. मंदिर व मठों में सरकारी हस्तक्षेप बंद हो।
उसी अनशन में अपने दिये वक्तव्य में तोगड़िया ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि पीएम बनने के बाद हिंदुओं से किए गए वादे भूल गए हैं। कांग्रेस सरकार के खिलाफ जब डॉ तोगड़िया हिंदू हित की आवाज बुलंद करते थे, तब भाजपा को अच्छा लगता था लेकिन अब वहीं तोगड़िया उन्हें आंख में चुभ रहा है। तोगड़िया ने कहा कि सत्ता में आने से पहले भाजपा नेता कहते थे कि उनके सत्ता में आते ही हिंदुओं की मांग वे चुटकियों में हल कर देंगे। आज देश का हिंदू उन्हीं चुटकियों की आवाज सुनने को तरस रहा है
तोगड़िया जी  कहा था कि उन्हें जो मांग करने पर विहिप से बाहर कर दिया गया वे उनकी निजी मांग नहीं है, भाजपा, आरएसएस व विहिप वर्षों से ये मांग करते आ रहे हैं, आज जब भाजपा खुद सत्ता में आ गई तो कांग्रेस के नक्शेकदम कपर चल रही है। 
यहाँ से उनके भाजपा पर आरोप और भी तीखे होते गए। इसी अनशन में उन्होने भाजपा पर अब तक तक सबसे बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने मोदी सरकार को यूटर्न वाली सरकार बताते हुए कहा कि कांग्रेस की चलाई योजनाओं मनरेगा, आधार कार्ड, जीएसटी, एफडीआई, अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती करने आदि ऐसे मुद्दे हैं जिस पर भाजपा सरकार ने यू टर्न किया है।

डॉ प्रवीण तोगड़िया ने तीसरे दिन उपवास समाप्त कर दिया। संत व कार्यकताओं ने तोगड़िया को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। तोगड़िया को शुगर व रक्तचाप की बीमारी थी। तीन दिन में उनका वजन तीन किलो घट गया था, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें अनशन तोड़ने की सलाह दी थी। 
उन्होंने अनशन तो समाप्त कर दिया लेकिन प्रण लिया कि अब वे इन मुद्दों पर देशभर में घूमकर हिंदू समाज को जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने बचपन से हिंदू समाज की सेवा का संकल्प लिया है तथा आजीवन समाज सेवा करते रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद' का गठन

Photo Credit-Amar Ujala


अपने विषयों को पूरा करने के लिए 24 जून 2018 को प्रवीण तोगड़िया ने अपने नए  संगठन 'अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद' का गठन किया। और स्पष्ट कहा था कि  "नई टीम बनी है वह अपना काम करेगी। टीम बदली है लेकिन तेवर नहीं बदले हैं।"  ये भी निर्धारित किया कि 26 जून को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे। साथ ही वो भाजपा के खिलाफ एक सभा भी करेंगे।
एचपी के साथ राष्ट्रीय बजरंग दल, राष्ट्रीय किसान परिषद, राष्ट्रीय मजदूर परिषद (40 वर्ष से ऊपर के लिए), ओजस्विनी (युवतियों के लिए) और राष्ट्रीय छात्र परिषद (छात्र, अध्यापक और अभिभावकों के लिए) अन्य संगठन भी घोषित कर दिये गए।
साथ ही पहले से चल रहे हिंदू हेल्प लाईन, इंडिया हेल्थ लाईन, एक मुट्ठी अनाज, हिंदू एडवोकेट्स फोरम और यूथ सोशिओ-इकनॉमिक डेवलपमेंट फोरम आदि कार्य भी चलते रहे।
तोगड़िया ने कहा था कि बड़े सपने बेचना ही काफी नहीं है। राष्ट्र निर्माण काम की सत्यता पर आधारित था, जो अभी वास्तव में दिखाई देना बाकी है। उन्होंने दावा किया था कि भाजपा से जुड़े बड़ी संख्या में लोग परेशान हैं कि मोदी सरकार सैद्धांतिक, सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर कुछ करती नहीं दिखाई दी और कई मौकों पर यू-टर्न ले गई।

सरकार को अक्टूबर के अंत तक का अल्टिमेटम

Photo Credit-Jagran
दो दिन बाद ही लखनऊ में तोगड़िया ने  प्रेस कांफ्रेंस करके कोर्ट के विशेषज्ञ वकीलों की सहायता से बनाया श्रीराम जन्मस्थान मंदिर विधेयक 2018 प्रस्तुत किया और केंद्र सरकार से सोमनाथ की तर्ज पर कानून बनाकर अयोध्या में राम मंदिर बनाने की मांग करी। इसके लिए उन्होंने सरकार को अक्टूबर के अंत तक का अल्टिमेटम दे दिया। ये अल्टिमेटम अपने आप में एक बड़ी चेतावनी थी।
Photo Credit-Jagran

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में तोगड़िया जी ने मोदी जी पर विशेष तंज़ कसते हुए कहा था कि हो सकता है मेरे बड़े भाई नरेंद्र मोदी को विदेश घूमने के कारण संसद में कानून बनाने का समय नहीं मिल रहा होगा वैसे तोगड़िया Vs मोदी तो पहले ही शुरू हो चुका था, किन्तु ये वक्तव्य एक बड़ा प्रहार था।

तोगड़िया Vs मोदी और बड़ा हो गया जब अगस्त 2019 के पहले सप्ताह में रांची में अपने संगठन विस्तार के बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर से मोदी जी पर निशाना साधा और कहा कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को 56 इंच का सीना दिखाएं। दावा किया कि हिंदू खुद को ठगा-ठगा महसूस कर रहे हैं। केंद्र की सरकार से उन्हें बहुत उम्मीदें थीं लेकिन सारी आशाओं पर पानी फिर गया। न राम मंदिर बना और न बांग्लादेशी घुसपैठिए बाहर गए। रोजगार का संकट लोगों के सामने खड़ा है। केंद्र समेत देश के 22 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं लेकिन हिंदू खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। एनआरसी पर तोगडि़या ने कहा कि इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहिए, सिर्फ जुमलेबाजी से काम नहीं चलेगा। कहा, दो करोड़ घुसपैठियों में से सरकार अब तक दो लाख लोगों को भी नहीं निकाल पाई है। यह सरकार की असफलता को दर्शाता है

आगे की घटनाएँ तीव्र गति से तोगड़िया Vs मोदी के प्रकरण को नई ऊंचाई पर ले गई। अगस्त 2018 के अंत में तोगड़िया ने 21 अक्तूबर 2०१८ के बाद राम मंदिर के लिए अयोध्या कूच करने की घोषणा करी और साथ ही मोदी जी पर नया आक्रमण बोला कि राम के सहारे बीजेपी देश की सत्ता तक पहुंची। सत्ता पर काबिज होते ही राम और राम मंदिर को भूल गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी नरेंद्र मोदी कभी अयोध्या नहीं आए। चार साल में केंद्र सरकार ने राम मंदिर पर कोई चर्चा तक नहीं की। अयोध्या में भव्य राममंदिर बनवाने के नाम पर हिंदुओं ने भाजपा को वोट देकर सिंहासन पर बैठाया, लेकिन भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं के लिए कानून बना दिया और राममंदिर को भूल गई। तोगड़िया ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के आदोलन को लेकर 21 अक्टूबर को लखनऊ से अयोध्या कूच किया जाएगा
मैं यहाँ अपने विचार अधिक न लिख कर तोगड़िया जी की वाणी ही लिखु रहा हूँ क्यूंकी उनकी वाणी मेरी लेखनी से अधिक तीखी रही।

सितम्बर 2018
Photo Credit-Jagran

हलचलें बहुत अधिक थी, वातावरण गरमा हुआ था। देश में हिन्दुत्व से संबन्धित विषयों पर चर्चाएं होती रही थी किन्तु मोदी सरकार का कोई कार्य दिखाई नहीं दे रहा था। इसी पर तोगड़िया ने मोदी जी पर श्री राम मंदिर विषय से आगे बड़ कर अन्य हिन्दुत्व के विषयों पर भी आरोप लगाना आरंभ कर दिया। अब वे बोले कि मोदी सरकार ने उन सभी हिदुत्ववादी मुद्दों से समझौता कर लिया है, जिसके नाम पर पार्टी सत्ता में आई। कहा कि मोदी ने समाज के हर वर्ग को कदम-कदम पर छला है। मोदी ने राम मंदिर निर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। समान नागरिक संहिता की चर्चा तक नहीं करते, और जनसंख्या नियंत्रण को एजेंडे में रखा तक नहीं। इन वजहों से देश खतरनाक स्थित में पहुंच गया है। देश में भयावह बेरोजगारी है। भाजपा की गलत नीतियों की वजह से ¨हदू समाज में भी विभाजन जैसी स्थितियां खड़ी होती जा रही हैं।

अपने अगले वाक बाण में उन्होने मोदी जी पर मुसलमानो ने गुप्त सम्झौता करने तक के आरोप लगा दिये। तोगड़िया ने रामपुर में कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों से कोई गुप्त समझौता कर लिया है। इसीलिए वह रामलला के दर्शन करने के लिए अयोध्या नहीं गए, लेकिन मस्जिदों में जा रहे हैं
राम मंदिर निर्माण के लिए जनता ने नरेंद्र मोदी को वकील बनाकर भेजा गया था, लेकिन वह तीन तलाक का कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं के वकील बन गए 
अपने आक्रमण को मोदी जी से बड़ा करते हुए उन्होने भाजपा को भी लपेटा कि भाजपा सरकार में हिंदुओं का कोई सम्मान नहीं है।
किन्तु अपने वक्तव्य में उन्होने एक संकेत भी दे दिया कि लोकसभा चुनाव नजदीक है। इस बार हिंदुओं की सरकार बनेगी निश्चित ये संकेत नए राजनैतिक दल बनाने का था।

श्रीराम जन्मभूमि की ओर कूच
अक्तूबर 2018
अपने नए संगठन के साथ डॉ प्रवीण तोगड़िया ने एक बार फिर अयोध्या में राममंदिर का मुद्दा उठाते हुए 21 अक्टूबर को लखनऊ से अयोध्या कूच का एलान किया। तोगड़िया ने भाजपा पर पुनः राममंदिर मामले में वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया और कहा कि देश के करोड़ों हिंदुओं की भावना को ठेस पहुंची है।
उन्होने भाजपा को याद दिलाया कि हिमाचल के पालमपुर में वर्ष 1989 में भाजपा ने राममंदिर का प्रस्ताव पारित किया था और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या रथयात्रा निकाली। अब जब पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो भाजपा ने कई पुराने कानून तो खत्म कर दिए। तीन तलाक, नोटबंदी, जीएसटी आदि मामलों में भी रातों रात फैसला कर लिए। एससी एसटी एक्ट के मामले में तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी पलटते हुए संसद में विधेयक पारित करा लिया, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर के मामले को न्यायालय के भरोसे छोड़ दिया
डॉ तोगड़िया ने भाजपा को आईना दिखाया कि भाजपा ने अपने लिए 500 करोड़ का कार्यालय बना लिया, लेकिन भगवान राम आज भी फटे तंबू में विराजमान हैं।
अब तोगड़िया ने आगामी 21 अक्टूबर को लखनऊ से अयोध्या कूच की और, 23 अक्टूबर को जनसभा घोषणा करी। तोगड़िया ने एक बार फिर से संकेत देकर कहा था कि हिंदू अब इस सरकार पर भरोसा नहीं करेगा और अबकी बार हिंदू सरकार का नारा बुलंद करेगा।  
लखनऊ में
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जैसा कि तोगड़िया जी ने 21 अक्तूबर के बाद अयोध्या कूच करने घोषणा करी थी, वे लखनऊ में इको गार्डन में अपने सहसत्रों समर्थकों के साथ इसी प्रयोजन के साथ इकट्ठे हुए। उनके आंदोलन से सकते में आई उत्तरप्रदेश भाजपा सरकार उन्हे कोई भी ढील देने के लिए तैयार नहीं दिखी। अयोध्या में उन्हे रैली करने की अनुमति नहीं दी गई तो वे लखनऊ में ही रैली करने की अनुमति मांगी तो वो भी नहीं मिली। साथ ही रैली के लिए रमाबाई रैली स्थल की बुकिंग भी रद कर दी गई।
अब वे लखनऊ से ही पैदल अयोध्या जाने की जिद पर अड़े थे। ऐसा में लखनऊ में ही उनकी गिरफ्तारी संभव थी।

अयोध्या में

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अब तोगड़िया जी अयोध्या में परमहंस की समाधि पर अपने सहसत्रों समर्थकों के साथ डटे थे और सरयू किनारे संकल्प सभा की तैयारी में थे। जबकि तब तक अयोध्या प्रशासन ने उन्हे इसके लिए अनुमति नहीं दी थी।
प्रवीण तोगड़िया, उनके सहसत्रों समर्थकों और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के कारण वातावरण इतना गरमाया था कि मुस्लिम पक्ष के दिवंगत हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी ने अपने लिए सुरक्षा मांगी क्यूंकी वे अपने को खतरा अनुभव कर रहे थे।

रामकोट की परिक्रमा और पुलिस से भिड़ंत

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वैसे तो अयोध्या में निषेधाज्ञा लगी थी किन्तु तोगड़िया जी और उनके समर्थक निषेधाज्ञा तोड़ कर रामकोट की परिक्रमा करने को निकल पड़े। 
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जिसमे उनके समर्थकों और पुलिस के बीच भिड़ंत भी हो गई। तोगडिय़ा के रामकोट की परिक्रमा के दौरान उनके समर्थकों व पुलिस के बीच हुई भिड़ंत के कारण माहौल में तनाव था।
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इससे एक दिन पहले ही यहां पर एक सभा में तोगड़िया Vs modi को और बड़ा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि केंद्र की मोदी सरकार मुस्लिमों के सम्मुख शरणागत होने का इंतजाम कर रही है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इशारों में मुस्लिम परस्त तक बोले और कहा कि केंद्र सरकार मुस्लिमों के सम्मुख शरणागत होने का इंतजाम कर रही है।
यहीं उन्होंने नारा दिया, मंदिर नहीं तो वोट नहीं। तोगडिय़ा ने दावा किया कि केरल, जम्मू, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि से हमारे रामसेवक साथी आए हैं और वे भाजपा को हराने का संदेश लेकर गांव-गांव जाएंगे। उन्होंने रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की मांग के साथ यह एलान भी किया कि मंगलवार को वे अगले प्रधानमंत्री के नाम का भी एलान करेंगे, जो सत्ता में आकर तुरंत मंदिर का निर्माण कराने वाला, युवाओं को रोजगार देने वाला, किसानों को कर्ज मुक्त करने वाला, पाकिस्तान को घुटनों के बल लाने वाला और सस्ती शिक्षा-सस्ता पेट्रोल देने वाला होगा 
ये नए प्रधानमंत्री का वक्तव्य अपने साथ कई नए संकेत लेकर आ रहा था।

नए राजनैतिक दल की घोषणा

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अंततः तोगड़िया जी अयोध्या में सरयू नदी के तट पर संकल्प सभा में नया राजनीतिक दल बनाने की घोषणा कर दी।
तोगड़िया vs मोदी युद्ध को याद दिलाते हुए वे बोले कि श्रीराम की नगरी में भगवान राम के साथ न्याय नहीं हो पा रहा है। अयोध्या में जिन्होंने मंदिर बनाने का वादा किया था उन्होंने दिल्ली में करीब पांच सौ करोड़ की लागत से अपना भव्य कार्यालय तो बनवा लिया लेकिन यहां पर रामलला आज भी टेंट में निवास कर रहे हैं
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उन्होने अयोध्या में ही सक्रिय राजनीति में उतरने की घोषणा भी की और कहा कि वे लोकसभा 2019 का चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद जब उनकी सरकार बनी तो वे अयोध्या, काशी व मथुरा पर फोकस करने के साथ इनका कायाकल्प कर देंगे। साथ ही कहा कि देश में अल्पसंख्यक जनसंख्या नियंत्रण पर कानून भी बनेगा।
उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि जिन लोगों ने राम के नाम पर चुनाव लड़ा वो सत्ता मिलते ही राम को भूल गए। उन्होंने अपने समर्थकों संग अबकी बार हिंदुओं की सरकार का नारा दिया। वे बोले कि सत्ता में बैठे लोग हिंदू हितों की बात भूल गए हैं। मस्जिदों में जाते हैं।
नई पार्टी के एलान के साथ ही तोगड़िया ने लोकसभा चुनाव लड़ने की भी घोषणा कर दी। तोगड़िया ने सत्ता में आने पर हर हिंदू को भोजन, शिक्षा व रोजगार देने का वादा किया। उन्होने स्पष्ट कहा कि वे राम मंदिर नहीं तो वोट नही का नारा लेकर जागरुकता फैलाएंगे और केंद्र में हिंदुओं की सरकार बनाने के लिए काम करेंगे। तोगड़िया ने मुस्लिमों की जनसंख्या पर भी नियंत्रण लगाने की बात कही।

राजनैतिक दल की औपचारिक घोषणा

अप्रैल 2018 से फरवरी 2019 तक तोगड़िया Vs मोदी जंग को ऊंचाई पर ले जाने के बाद अंततः तोगड़िया जी ने 9 फरवरी 2019 को दिल्ली में अपने राजनैतिक दल हिंदुस्थान निर्माण दल की घोषणा कर दी। दिल्ली में हुए बड़े कार्यक्रम में देश भर से 20,000 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और अपने अजेंडे को सम्पूर्ण करने की प्रतिज्ञा करी।
Photo Credit-Hinduexistence.org
इस नए राजनैतिक दल ने लोकसभा 2019 का चुनाव और आगे के सभी चुनाव लड़ने की भी घोषणा करी। भारतीय राजनीति में पहली बार ऐसा हुआ था जब एक ही प्रकार के अजेंडे के साथ दो राजनैतिक दल अपने विशाल दल-बल के साथ राजनीति के पटल पर थे। एक भारतीय जनता पार्टी और दूसरी हिंदुस्थान निर्माण दल। एक पार्टी केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में विराजमान थी और दूसरी जन्म ले रही थी।  
वैसे मैं इसे भाजपा Vs HND तो मानता ही हूँ किन्तु साथ ही तोगड़िया Vs मोदी भी मानता हूँ। तोगड़िया जी के पास हिंदुओं के लिए 50 वर्ष का सामाजिक स्तर कार्य करने के अनुभव और सार्वजनिक सम्मान है और मोदी जी के पास 3 बार गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री होने का सम्मान प्राप्त है। तोगड़िया जी के पास धरातल पर काम करने वाले लाखों हिन्दू कार्यकर्ताओं की सेना है जो भाजपा और मोदी जी के हिन्दुत्व पर खोखले वादों से उकता चुकी है और अपने लक्ष्य नए माध्यम से प्राप्त करने के लिए आतुर है। उधर मोदी जी के पास भाजपा कार्यकर्ता, आरएसएस और वीएचपी का बचाखुचा संगठन है। साथ ही उनके पास सोशल मीडिया पर लाखों समर्थकों की भीड़ है जो दिन रात मोदी मोदी करती है।
लोकसभा 2019 के चुनावों में तोगड़िया टीम और उनके राजनैतिक दल को अनदेखा करना असंभव होगा क्यूंकी उनके पास दल बल है और भाजपा के अपने वचनों से बार बार पलटने के बाद उकताया हुआ भारतीय जनमानस है जो नए सशक्त हिन्दुत्व के नेतृत्व को स्वीकार करने को आतुर भी है। भाजपा और अन्य पार्टियों से रुष्ट कितने उम्मीदवार HND से चुनाव लड़ेंगे और लोकसभा चुनावों को प्रभावित करेंगे, इसका उत्तर भविष्य के गर्भ में है। किन्तु HND की उपस्थिती ने चुनावों को रुचिकर तो बना ही दिया है।
2014 में भले अब की बार, मोदी सरकार सफल रहा हो, किन्तु अब 2019 में ये नारा इतना प्रभावशाली होता नहीं दिख रहा है।
इसलिए अंत में अब इस तोगड़िया Vs मोदी की जंग में मैं एक ही प्रश्न खड़ा करना चाहता हूँ कि 
क्या अब की बार, तोगड़िया का प्रहार”?




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