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पर्दाफाश-मोदी सरकार का 10% सवर्ण आरक्षण बिल नहीं, अल्पसंख्यक आरक्षण बिल कहो!!



भारत की संसद में साधारण श्रेणी के नागरिकों को आर्थिक आधार पर
10% आरक्षण का कानून पास होने को है और सारे देश मे इसी की चर्चा है। भाजपा और मोदी जी के सभी समर्थक इस आरक्षण कानून पर उनका गुणगान करने में भी व्यस्त हैं और 2019 के चुनावों के लिए इसे 
मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है। 
इस कानून में साधारण श्रेणी के नागरिकों के लिए आरक्षण पाने के लिए कुछ नियम भी बनाए गए हैं। 
संदर्भ- 

ये नियम आर्थिक आधार पर हैं, धार्मिक आधार पर नहीं। इसलिए ये आरक्षण धर्म के आधार पर सबके लिए है, किसी विशेष धर्म के अनुयायियों के लिए नहीं।
किन्तु तनिक अवलोकन करें कि धर्म के आधार पर ये किस विशेष वर्ग को लाभ देगा। और ये भी निर्णय लें कि मोदी सरकार का ये आरक्षण कानून मास्टर स्ट्रोक है अथवा हिट विकेट!
2011 की जनसंख्या गणना के आधार पर भारत में हिन्दू जनसंख्या 
79.8% और सभी अल्पसंख्यकों सहित अन्य 20.2% है। सभी अल्पसंख्यकों सहित अन्य की 20.2% जनसंख्या में 5 अल्पसंख्यक समुदाय अर्थात मुस्लिम 14.2 %; ईसाई 2.3 %; सिख1.7 %; बौद्ध0.7 %; जैन 0.4 % के आधार पर कुल 19.3% हैं। इनमें कुछ गणना ओबीसी के अंतर्गत भी आती है।

नए आरक्षण कानून के आधार पर भारत के सभी अल्पसंख्यकों सहित अन्य (भारतीय जनसंख्या के 20.2%)  नए 10% आरक्षण के अधिकारी बन गए हैं। मुस्लिम जनसंख्या का कुछ वर्ग पहले से ही ओबीसी श्रेणी में भी आरक्षण प्राप्त कर रहा है।

"आगे समझते हैं कि कितने प्रतिशत हिंदुओं को इस आरक्षण का लाभ मिलेगा"

आरक्षण के आधार पर हिन्दू जनसंख्या अनारक्षित वर्ग और आरक्षित वर्ग में विभाजित है। हिंदुओं के आरक्षित वर्ग में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी आते हैं।
हिंदुओं के आरक्षित वर्ग की जनसंख्या इस प्रकार है।
अनुसूचित जाति 16.2%, 
अनुसूचित जनजाति 8.2% और
अन्य पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी 41% (2007 के सरकारी सर्वे के आधार पर) है।

इनका जोड़ करें तो भारत की जनसंख्या का कुल 66.4% है। 

संदर्भ- 

इस गणना से हिंदुओं के अनारक्षित वर्ग अर्थात साधारण श्रेणी के हिंदुओं की जनसंख्या 14.3%” आती है।
हिन्दुओ की कुल जनसंख्या 79.8%
हिंदुओं का आरक्षित वर्ग-66.4%
[79.8%-66.4%=14.3%]

इस नए आरक्षण कानून का लाभ भारत के हिंदुओं के अनारक्षित वर्ग को ही मिलेगा जिनकी जनसंख्या 14.3% है

तो सभी मुख्यतः अल्पसंख्यकों सहित अन्य 20.2% & साधारण श्रेणी के मात्र 14.3% हिन्दू  इस नए आरक्षण के अधिकारी बनेंगे और इस आरक्षण का लाभ ले पाएंगे।

सीधे सीधे स्पष्ट है कि अल्पसंख्यको की अधिक जनसंख्या को बहुसंख्यक हिंदुओं के साधारण श्रेणी हिंदुओं की अपेक्षा अधिक लाभ मिलने के लक्षण हैं और अल्पसंख्यको की बड़ी जनसंख्या ही इस नए आरक्षण कानून के लाभ की अधिकारी है।


अब मेरी सीधी सीधी घोषणा यही है कि ये सवर्ण आरक्षण कानून नहीं, अल्पसंख्यक आरक्षण कानून है। और सम्पूर्ण मीडिया, मोदी सरकार, भाजपा नेता और मोदी समर्थक इस नए आरक्षण कानून को सवर्ण आरक्षण कानून न बोल कर, अल्पसंख्यक आरक्षण कानून बोलें तो उचित होगा।

सत्य ये है कि मोदी सरकार के लिए ये नया आरक्षण कानून मास्टर स्ट्रोक नहीं, हिट विकेट प्रमाणित होगा। 

समय की मांग ये है कि इस नए आरक्षण कानून पर देश की जनता को भ्रमित न किया जाए और जागरूक किया जाये। 

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